प्राथमिक जाँच में निर्दोष पाए गए दिवंगत रोहित के ऊपर अब मोटे तौर पर दो और आरोप हैं उसने बीफ पार्टी की और आतंकी याकूब का समर्थन किया इसीलिए उसकी आत्महत्या उचित और सराहनीय है. जिस मारपीट के आरोप में उसे होस्टल से निकाल फेंका उससे हटकर लगाए ये दो आरोप उसका केरेक्टर अससिनेशन है. इनका उसकी सजा से कोई लेना देना नहीं है. क्या बीफ पार्टी अपराध है या असंवैधानिक है ? विवेकानंद ने हिन्दू समाज में बीफ खाने की प्रथा को सही बताया तो क्या वो भी याकूब को सपोर्ट और फांसी का विरोध दो अलग बातें है लगभग सारे देश में तब ये प्रश्न था की उसे फांसी नहीं आजीवन कारावास मिलना चाहिए था , मतलब सारा देश एंटी नेशनल हो गया ? किस संविधान में लिखा है की फांसी का विरोध एंटी-नेशनल है ? फिर तो फांसी का विरोध करने वाले अब्दुल कलाम और सरकारी संस्था ला-कमीशन भी एंटीनेशनल हुए ? खलिस्तानी आतंकवादी राजौना और भुल्लर का समर्थन करने वाले भाजपाई और अकाली दल भी एंटी नेशनल हुए ? राजीव के २६ हत्यारों को दी फांसी का चेन्नई में भारी विरोध किया तो कोर्ट ने ४ को फांसी और बाकी को कारावास दिया . जुलाई १५ को सरकार की अर्जी पर फांसी को कारावास में बदल दिया गया फिर क्या कारण है याकूब की फांसी का विरोध करने पर अम्बेडकरवादी छात्र को एक केन्द्रीय मंत्री राष्ट्रद्रोही घोषित कर देता है और देश का शिक्षा विभाग उसे हफ़्तों उसके ही होस्टल के सामने सड़क पर सोने मजबूर कर देता है ? "वो आतंकवादी था" , "नक्सली था" , "देश द्रोही , जातिवादी और "गुण्डा था" , इन सब राजनितिक बयानबाज़ी से ऊपर उठकर हमें इस जातिवादी व्यवस्था का विरोध करना होगा मिलकर दोषियों को सजा दिलानी होगी . मुझे आपके पोस्ट या कमेन्ट पढ़कर दुःख हुआ इसीलिए आपको टेग कर रहा हु . ऐसा सिर्फ ये पोस्ट आपके संज्ञान में लाने के लिए है
by Aditya Chourasiya
January 20, 2016 at 01:41PM
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Wednesday, January 20, 2016
प्राथमिक जाँच में निर्दोष पाए गए दिवंगत रोहित के ऊपर अब मोटे तौर पर दो और आरोप हैं उसने बीफ पार्टी की और आतंकी याकूब का समर्थन किया इसीलिए उसकी आत्महत्या उचित और सराहनीय है. जिस मारपीट के आरोप में उसे होस्टल से निकाल फेंका उससे हटकर लगाए ये दो आरोप उसका केरेक्टर अससिनेशन है. इनका उसकी सजा से कोई लेना देना नहीं है. क्या बीफ पार्टी अपराध है या असंवैधानिक है ? विवेकानंद ने हिन्दू समाज में बीफ खाने की प्रथा को सही बताया तो क्या वो भी याकूब को सपोर्ट और फांसी का विरोध दो अलग बातें है लगभग सारे देश में तब ये प्रश्न था की उसे फांसी नहीं आजीवन कारावास मिलना चाहिए था , मतलब सारा देश एंटी नेशनल हो गया ? किस संविधान में लिखा है की फांसी का विरोध एंटी-नेशनल है ? फिर तो फांसी का विरोध करने वाले अब्दुल कलाम और सरकारी संस्था ला-कमीशन भी एंटीनेशनल हुए ? खलिस्तानी आतंकवादी राजौना और भुल्लर का समर्थन करने वाले भाजपाई और अकाली दल भी एंटी नेशनल हुए ? राजीव के २६ हत्यारों को दी फांसी का चेन्नई में भारी विरोध किया तो कोर्ट ने ४ को फांसी और बाकी को कारावास दिया . जुलाई १५ को सरकार की अर्जी पर फांसी को कारावास में बदल दिया गया फिर क्या कारण है याकूब की फांसी का विरोध करने पर अम्बेडकरवादी छात्र को एक केन्द्रीय मंत्री राष्ट्रद्रोही घोषित कर देता है और देश का शिक्षा विभाग उसे हफ़्तों उसके ही होस्टल के सामने सड़क पर सोने मजबूर कर देता है ? "वो आतंकवादी था" , "नक्सली था" , "देश द्रोही , जातिवादी और "गुण्डा था" , इन सब राजनितिक बयानबाज़ी से ऊपर उठकर हमें इस जातिवादी व्यवस्था का विरोध करना होगा मिलकर दोषियों को सजा दिलानी होगी . मुझे आपके पोस्ट या कमेन्ट पढ़कर दुःख हुआ इसीलिए आपको टेग कर रहा हु . ऐसा सिर्फ ये पोस्ट आपके संज्ञान में लाने के लिए है January 20, 2016 at 01:41PM
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