तय करो किस ओर हो तुम, तय करो किस ओर हो । आदमी के पक्ष में हो, या कि आदमखोर हो ।। ख़ुद को पसीने में भिगोना, ही नहीं है ज़िन्दगी । रेंग कर मर-मर कर जीना, ही नहीं है ज़िन्दगी ।। कुछ करो कि ज़िन्दगी की, डोर न कमज़ोर हो । तय करो किस ओर हो तुम, तय करो किस ओर हो ।। खोलो आँखें फँस न जाना, तुम सुनहरे जाल में । भेड़िए भी घूमते हैं, आदमी की खाल में ।। ज़िन्दगी का गीत हो या मौत का कोई शोर हो । तय करो किस ओर हो तुम तय करो किस ओर हो ।। सूट और लंगोटियों के बीच युद्ध होगा ज़रूर, झोपड़ों और कोठियों के बीच युद्ध होगा ज़रूर, इससे पहले युद्ध शुरू हो, तय करो किस ओर हो । तय करो किस ओर हो तुम तय करो किस ओर हो ।। तय करो किस ओर हो तुम तय करो किस ओर हो । आदमी के पक्ष में हो या कि आदमखोर हो ।। - बल्ली सिंह चीमा Jitendra Singh से साभार
by Aditya Chourasiya
March 25, 2016 at 03:42PM
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Friday, March 25, 2016
तय करो किस ओर हो तुम, तय करो किस ओर हो । आदमी के पक्ष में हो, या कि आदमखोर हो ।। ख़ुद को पसीने में भिगोना, ही नहीं है ज़िन्दगी । रेंग कर मर-मर कर जीना, ही नहीं है ज़िन्दगी ।। कुछ करो कि ज़िन्दगी की, डोर न कमज़ोर हो । तय करो किस ओर हो तुम, तय करो किस ओर हो ।। खोलो आँखें फँस न जाना, तुम सुनहरे जाल में । भेड़िए भी घूमते हैं, आदमी की खाल में ।। ज़िन्दगी का गीत हो या मौत का कोई शोर हो । तय करो किस ओर हो तुम तय करो किस ओर हो ।। सूट और लंगोटियों के बीच युद्ध होगा ज़रूर, झोपड़ों और कोठियों के बीच युद्ध होगा ज़रूर, इससे पहले युद्ध शुरू हो, तय करो किस ओर हो । तय करो किस ओर हो तुम तय करो किस ओर हो ।। तय करो किस ओर हो तुम तय करो किस ओर हो । आदमी के पक्ष में हो या कि आदमखोर हो ।। - बल्ली सिंह चीमा Jitendra Singh से साभार March 25, 2016 at 03:42PM
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