पुरस्कार लौटाने के संदर्भ में एक नई थ्योरी लाँच हुई है । दीवार फ़िल्म में विजय अपने थानेदार भाई से कहता है कि मैं अपराधी हूँ तो वो दुनिया भी अपराधी है जिसने मुझे बनाया है । वो कहने लगता है ” जाओ पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने मेरे हाथ पर लिखा मेरा बाप चोर है ।” विजय इस संवाद को कहते कहते झुँझलाने लगता है । थानेदार भाई बिना झुँझलाये सुन रहा होता है । विजय जितनी बार ये कहता है, थानेदार भाई की नज़र में अपराधी साबित होता जाता है । वो उस आदमी का साइन लेने नहीं जाता है बल्कि अपने भाई को गिरफ़्तार करने का इरादा मज़बूत कर लेता है । क्या आपने तब पुरस्कार लौटाया? क्या आपने चौरासी के दंगों का विरोध किया ? क्या आपने आपातकाल का विरोध किया ? यह नया पैमाना है । नेता कांग्रेसी से रातों रात भाजपाई हो सकता है, भाजपाई से सपाई हो सकता है लेकिन लेखक फ़िल्मकार और वैज्ञानिक को सवाल उठाने से पहले कांग्रेस विरोधी होने का प्रमाण देना होगा । व्यक्तिगत रूप से पूछा जा रहा है कि आपने इख़लाक़ की हत्या पर कार्यक्रम किया तो पुजारी की हत्या पर की ? फिर तो मेरा सवाल सही है कि इख़लाक़ की हत्या पर प्रधानमंत्री क्यों चुप रहे ? वो क्यों नहीं गए दोनों जगहों पर? क्यों बीजेपी से जब पूछा जाता है कि प्रधानमंत्री क्यों चुप रहे तो जवाब मिलता है कि राजनाथ सिंह ने निंदा की, वित्त मंत्री ने निंदा की । बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह क्यों नहीं गए दादरी या वो क्यों नहीं गए पुजारी की हत्या पर शोक जताने ? क्या कलबुर्गी की हत्या पर शोक जताने के लिए येदुरप्पा का जाना बीजेपी का जाना नहीं माना जाए या केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा का दादरी जाना नहीं माना जाए क्योंकि उनसे बड़े नेता तो गए नहीं ? दलितों पर नरसंहार के ख़िलाफ़ बोलने वाले क्या सिर्फ कांग्रेसी थे ? Ravish Kumar
by Aditya Chourasiya
November 03, 2015 at 08:23PM
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Tuesday, November 3, 2015
पुरस्कार लौटाने के संदर्भ में एक नई थ्योरी लाँच हुई है । दीवार फ़िल्म में विजय अपने थानेदार भाई से कहता है कि मैं अपराधी हूँ तो वो दुनिया भी अपराधी है जिसने मुझे बनाया है । वो कहने लगता है ” जाओ पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने मेरे हाथ पर लिखा मेरा बाप चोर है ।” विजय इस संवाद को कहते कहते झुँझलाने लगता है । थानेदार भाई बिना झुँझलाये सुन रहा होता है । विजय जितनी बार ये कहता है, थानेदार भाई की नज़र में अपराधी साबित होता जाता है । वो उस आदमी का साइन लेने नहीं जाता है बल्कि अपने भाई को गिरफ़्तार करने का इरादा मज़बूत कर लेता है । क्या आपने तब पुरस्कार लौटाया? क्या आपने चौरासी के दंगों का विरोध किया ? क्या आपने आपातकाल का विरोध किया ? यह नया पैमाना है । नेता कांग्रेसी से रातों रात भाजपाई हो सकता है, भाजपाई से सपाई हो सकता है लेकिन लेखक फ़िल्मकार और वैज्ञानिक को सवाल उठाने से पहले कांग्रेस विरोधी होने का प्रमाण देना होगा । व्यक्तिगत रूप से पूछा जा रहा है कि आपने इख़लाक़ की हत्या पर कार्यक्रम किया तो पुजारी की हत्या पर की ? फिर तो मेरा सवाल सही है कि इख़लाक़ की हत्या पर प्रधानमंत्री क्यों चुप रहे ? वो क्यों नहीं गए दोनों जगहों पर? क्यों बीजेपी से जब पूछा जाता है कि प्रधानमंत्री क्यों चुप रहे तो जवाब मिलता है कि राजनाथ सिंह ने निंदा की, वित्त मंत्री ने निंदा की । बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह क्यों नहीं गए दादरी या वो क्यों नहीं गए पुजारी की हत्या पर शोक जताने ? क्या कलबुर्गी की हत्या पर शोक जताने के लिए येदुरप्पा का जाना बीजेपी का जाना नहीं माना जाए या केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा का दादरी जाना नहीं माना जाए क्योंकि उनसे बड़े नेता तो गए नहीं ? दलितों पर नरसंहार के ख़िलाफ़ बोलने वाले क्या सिर्फ कांग्रेसी थे ? Ravish Kumar November 03, 2015 at 08:23PM
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