साजिदा घर के कमरे में बिखरी ईंटों की तरफ इशारा करती है. बगल में रेफ्रीज्रेटर गिरा पड़ा है. फर्श पर खून के धब्बे लगे हैं. वह बताती है कि उन लोगों ने मेरे अब्बा को घसीटते हुए घर से बाहर निकाला. और उन्हें ईंटसे मार-मार कर उनकी हत्या कर दी. फिर उन्होंने मेरे भाई को घसीटा और आंगन में ले गये. उसके सर पर भी ईंट से प्रहार किया गया. उसके सीने पर भी ईंट से हमला किया गया. वह बेहोश हो गया. फिर उन्होंने ने मेरे साथ छेड़-छाड़ करने की कोशिश की. मेरी दादी के मुंह पर मारा गया. उन्होंने मुझे धमकी दी अगरमैंने पुलिस से एक शब्द भी कहा तो मेरी हत्याकर दी जायेगी.साजिदा कहती है-जब सारी वारदात खत्म हो गयी तो वहां पुलिस पहुंची. साजिदा कहती है. मंदिरसे किया गया ऐलान अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि भीड़ उसके दरवाजे पर पहुंच गयी थी. तब रात के साढ़े दस बज रहे थे. उसके कुछ ही पल पहले मंदिर से ऐलान किया गया था कि हम लोगों ने एक गाय की हत्या की है. हमें पता भी नहीं चला कि मंदिर से क्या ऐलान किया जा रहा है. ऐलान अभी खत्म भी नहीं हुआ कि वे हमारे घर पर पहुंचे और दरावेजे तोड़ दिये. वे हमें गालियां दे रहे थे और कह रहे थे कि हमने अपने घर में गोमांस रखा है.इस पहले कभी नहीं था तनावसाजिदा बताती है कि उसका परिवार दशकों से वहां रहता है लेकिन कभी भी साम्प्रदायिक तनाव नहीं हुआ. हमारे घर में अकसर हिंदुओं कोदावत दी जाती रही है. बकरीद के दिन भी हमारे घर लोग आये थे. लेकिन उस रात जब भीड़ मेरे घर पहुंची. उन्होंने फ्रीज खोला. उसमें बकरे का कुछ मांस पड़ा था. वे उस मांस को भी ले गये. वहबकरे के गोश्त को गोमांस बता रहे थे.पुलिस ने उस मांस को बरामद करके जांच के लिए भेजा है.साजिदा कहती है कि अगर जांच के बाद यह साबित हो जाये कि उसके घर में रखा मांस गाय का नहीं था तो क्या वे मेरे अब्बा को मुझे जीवित सौंपदेंगे?
by Aditya Chourasiya
September 30, 2015 at 11:34PM
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Wednesday, September 30, 2015
साजिदा घर के कमरे में बिखरी ईंटों की तरफ इशारा करती है. बगल में रेफ्रीज्रेटर गिरा पड़ा है. फर्श पर खून के धब्बे लगे हैं. वह बताती है कि उन लोगों ने मेरे अब्बा को घसीटते हुए घर से बाहर निकाला. और उन्हें ईंटसे मार-मार कर उनकी हत्या कर दी. फिर उन्होंने मेरे भाई को घसीटा और आंगन में ले गये. उसके सर पर भी ईंट से प्रहार किया गया. उसके सीने पर भी ईंट से हमला किया गया. वह बेहोश हो गया. फिर उन्होंने ने मेरे साथ छेड़-छाड़ करने की कोशिश की. मेरी दादी के मुंह पर मारा गया. उन्होंने मुझे धमकी दी अगरमैंने पुलिस से एक शब्द भी कहा तो मेरी हत्याकर दी जायेगी.साजिदा कहती है-जब सारी वारदात खत्म हो गयी तो वहां पुलिस पहुंची. साजिदा कहती है. मंदिरसे किया गया ऐलान अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि भीड़ उसके दरवाजे पर पहुंच गयी थी. तब रात के साढ़े दस बज रहे थे. उसके कुछ ही पल पहले मंदिर से ऐलान किया गया था कि हम लोगों ने एक गाय की हत्या की है. हमें पता भी नहीं चला कि मंदिर से क्या ऐलान किया जा रहा है. ऐलान अभी खत्म भी नहीं हुआ कि वे हमारे घर पर पहुंचे और दरावेजे तोड़ दिये. वे हमें गालियां दे रहे थे और कह रहे थे कि हमने अपने घर में गोमांस रखा है.इस पहले कभी नहीं था तनावसाजिदा बताती है कि उसका परिवार दशकों से वहां रहता है लेकिन कभी भी साम्प्रदायिक तनाव नहीं हुआ. हमारे घर में अकसर हिंदुओं कोदावत दी जाती रही है. बकरीद के दिन भी हमारे घर लोग आये थे. लेकिन उस रात जब भीड़ मेरे घर पहुंची. उन्होंने फ्रीज खोला. उसमें बकरे का कुछ मांस पड़ा था. वे उस मांस को भी ले गये. वहबकरे के गोश्त को गोमांस बता रहे थे.पुलिस ने उस मांस को बरामद करके जांच के लिए भेजा है.साजिदा कहती है कि अगर जांच के बाद यह साबित हो जाये कि उसके घर में रखा मांस गाय का नहीं था तो क्या वे मेरे अब्बा को मुझे जीवित सौंपदेंगे? September 30, 2015 at 11:34PM
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